जीवनपथ पर चलने वाले दुख से मत घबरा,
फूल जो चुनने निकला है,काँटों से भी हाथ मिला.
सुख नहीं जब रह पाया,तो फिर दुख कैसे रह पाएगा,
आना-जाना रीत है जग की,आया है वो जाएगा,
रुकना मत किसी मोड़ पे थककर,आगे क़दम बढ़ा.
फूल जो चुनने निकला है,काँटों से भी हाथ मिला.
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