Saturday, 12 April 2014

Devnandan Public School : कामयाब रहे हम

बिहार के नालन्दा जिला स्थित बिन्द गाँव में “हमारे गाँव” कॉंसेप्ट के तहत एजुकेशनल अवेयरनेस के लिए शुरू किए गए देवनन्दन पब्लिक स्कूल का पहला शैक्षणिक सत्र (2013-14) पूरा हुआ. यह स्कूल का पहला वर्ष था. पहले वर्ष कुल 36 बच्चों ने नामांकन कराया था. ज्यादातर बच्चे बड़ी उम्र के थे, अपनी क्लास से बड़े. जैसे नर्सरी के बच्चे की उम्र 3 साल के आसपास होनी चाहिए, मगर पाँच साल तक के बच्चे को भी नर्सरी में ही रखना पड़ा, क्योंकि उन्हें इंग्लिश का बिल्कुल ही ज्ञान नहीं था. हालाँकि वे बच्चे पास-पड़ोस के गाँव के ही किसी न किसी स्कूल में पढ़ने जाते थे. इसी वजह से हमने पहले वर्ष नर्सरी से स्टैंडर्ड वन तक की पढ़ाई शुरू की थी. क्लास से बड़ी उम्र के बच्चे को जूनियर से लेकर स्टैंडर्ड वन में जाँच परखकर रखा गया, और कोशिश की गई कि सभी बच्चे उम्र के अनुसार क्लास में आ जाएँ. सुखद यह रहा कि मेरे, टीचर्स और बच्चे के कलेक्टिव प्रयास से हमने तय लक्ष्य हासिल करने में हम कामयाब रहे. और हम गर्व से कह सकते हैं कि बच्चे क्लास के अनुसार लिखना-पढ़ना सीख गए हैं.
स्कूल के गाँव में होने की वजह से शुरूआती स्तर पर टीचर्स ढूँढने से लेकर गाड़ी की व्यवस्था करने तक में काफी मशक्कत करनी पड़ी. नौकरी की तलाश के लिए पढ़े-लिखे लोगों के शहर पलायन कर जाने की वजह स्थानीय इलाकों में अच्छा टीचर ढूँढना मुश्किल हुआ. शहर से टीचर लाना चाहा, तो टीचर गाँव की वजह से आने को तैयार नहीं हुए. फिर मैंने स्थानीय लड़कियाँ, जो गाँव में ही रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रही थीं, उनपर ध्यान फोकस किया. दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बीए में पढ़ रही लड़कियों को भी इंग्लिश का सामान्य ज्ञान तक नहीं था. अल्फावेट से लेकर स्टोरी तक उन्हें पढ़ाना पड़ा. सुखद यह रहा कि उन लड़कियों ने मेहनत कर बहुत कम समय में बच्चों को पढ़ाने भर सीख लिया. ग्रामीण इलाका होने की वजह से लगभग पेरेंट्स अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे हैं, इसलिए टीचर्स को ज्यादा स्ट्रेन लेना पड़ा. मगर बच्चों की प्रोग्रेस को देखकर पेरेंट्स खुश हैं. वे खुश हैं कि उनके बच्चे गाँव में रहकर शहरों जैसी पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से कर रहे हैं.

दूसरे साल में प्रवेश के साथ ‘स्टैंडर्ड टू’ तक क्लास बढ़ा दी गई है. नए एडमिशंस हो रहे हैं. हालाँकि कई बच्चे स्कूल छोड़कर अपनी अलग-अलग वजहों से गये भी हैं, मगर नए बच्चों का आना जारी है. इस साल स्कूल ने अपनी गाड़ी लेने का विचार किया है, जो कि बहुत जल्द आ जाएगी.       

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