Thursday, 19 July 2012

हमारे गाँव


 हमारे गाँव
हमारे गाँव पत्रकार-लेखक-फिल्मकार,समाज विश्लेषक व चिंतक धनंजय कुमार द्वारा सृजित, विस्तारित और क्रियान्वित विचार है।
·         हमारे गाँव, एक ऐसी (अवधारणा) संकल्पना है, जिसके माध्यम से किसी भी अविकसित गाँव को विकास की पटरी पर तेजी से दौड़ाया जा सकता है। यह गाँव को आत्मनिर्भर बनाता है। गाँव में रोजगार पैदा करता है, खुशहाली लाता है और ग्रामवासियों में आत्मविश्वास का अद्भुत संचार करता है।
·         यह गाँव का सर्वांगीण विकास करता है और सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक विकास के साथ-साथ राजनीतिक व सांस्कृतिक विकास को भी समुचित महत्व देता है।
·         यह अभावों, अव्यवस्थाओं, कुरीतियों, दुराग्रहों, सरकारी मशीनरी की  अकर्मण्यता आदि का रोना नहीं रोता, बल्कि अपने कर्म, कर्त्तव्यनिष्ठा और कौशल्य के सहारे सतत् चुनौतियों से लड़ता आगे बढ़ता है।
·         यह खेती,जो कि किसानों के लिए घाटे का कारोबार बनी है, उसे लाभ में तब्दील करता है।
·         हमारे गाँव के माध्यम से किसान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अनाज, सब्जियों, फूलों और फलों आदि के अधिकतम उत्पादन प्राप्त करते हैं।
·         हमारे गाँव के माध्यम से किसान अपने उत्पादों की स्वयं मार्केटिंग करते हैं और बाजार से वाजिब मुनाफा कमाते हैं। इस तरह से उत्पादक और उपभोक्ता सीधे मिलते हैं, और दोनों फायदे में रहते हैं।
·         यह आम आदमी से लेकर खास आदमी तक की सेहत से सरोकार रखता है। इसलिए आर्गेनिक फार्मिंगको अपनाता है और नाश्ते व भोजन में छिपे केमिकल्स और पेस्टिसाइड की उपस्थिति को न्यूनतम करता है। यानी यह उत्पादक और उपभोक्ता दोनों की अच्छी सेहत का ध्यान रखता है।
·         यह गाँव से शहर की ओर हो रहे अंधाधुंध पलायन को रोकता है। पलायन की वजह से मजदूरों और प्रतिभाओं की कमी झेल रहे गाँवों और बढ़ती आबादी की मार सह रहे नगरों-महानगरों, दोनों को राहत मिलती है।
·         यह आर्थिक विषमताओं को खत्म करने में सक्षम है। आर्थिक प्रगति की धुरी,जो सिर्फ महानगरों में घूमती है, यह उसे गाँवों में स्थापित करता है। आज अर्थ का प्रवाह नगर से गाँव की तरफ है, यह अर्थ के प्रवाह को दोतरफा बनाता है। यानी पैसा नगर से गाँव की  तरफ आता है, तो पैसा गाँव से नगर की तरफ भी जाता है।
·         यह गाँव का कुछ इस तरह विकास करता है कि गाँव का गँवई सौन्दर्य भी बना रहता है और शहर की सुविधाएँ भी उपलब्ध हो जाती हैं।
·         यह राष्ट्र के विकास के लिए अभिशाप मानी जा रही आबादी को वरदान में परिवर्तित करता है।
·         हमारे गाँव का अंतिम लक्ष्य है पूरे विश्व से भुखमरी का नामोनिशान मिटाना और पूरी सृष्टि को खुशहाल बनाना। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चिद् दुःख भाग भवेत्।के सदविचार को साकार करना।
·         यह इस भ्रांति को तोड़ता है कि पैसा कमाना है, तो शहरों का रुख करना पड़ेगा। साथ ही, यह साबित करता है कि गाँवों में भी अच्छी जिन्दगी जीने लायक पैसा कमाया जा सकता है।
·         यह इस भ्रांति को भी तोड़ता है कि शहरों में मिलने वाली सुविधाएँ गाँवों में नहीं विकसित की जा सकतीं।
·         यह गाँव की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभारने के लिए उचित वातावरण और सहयोग का निर्माण करता है।
·         यह व्यक्ति को समाज व राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी और कर्त्तव्यनिष्ठ बनाता है।
·         यह प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करता है और प्राकृतिक संपदाओं का कोई नुकसान न हो, इसका घ्यान रखता है। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पहले भरपाई की व्यवस्था करता है।
·         यह ग्रामीण समाज में पारंपरिक संयुक्त परिवार को पुनर्स्थापित करता है। इस तरह से नित एकल परिवार की त्रासदी के शिकार हो रहे बुजुर्गों के जीवन में पुनः खुशियाँ लौटाता है।
·         यह आधुनिक समाज के इस दुराग्रह को तोड़ता है कि परिवार  व्यक्ति के लिए बोझ है, पाँव की बेड़ी है, और यह साबित करता है कि जैसे कहावत में एक से भले दो होते हैं, वैसे ही एक व्यक्ति से भला एकल परिवार होता है और एकल परिवार से भला संयुक्त परिवार।




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